केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बरकरार, कांग्रेस में तेज हुई अंदरूनी हलचल
Suspense over Chief Minister's Post Persists in Kerala
नई दिल्ली। Suspense over Chief Minister's Post Persists in Kerala, केरलम में मुख्यमंत्री कौन?, यह अभी भी सबसे बड़ा सवाल है। केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई से भी ज्यादा बहुमत मिला है लेकिन चुनावी नतीजे आने के एक सप्ताह बाद भी मुख्यमंत्री के चयन को लेकर असमंजस बरकरार है।
यहां कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेता पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, विपक्ष के नेता रहे वीडी सतीशन और कांग्रेस की प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष रमेश चेन्निथेला मुख्यमंत्री की दौड़ में बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, सीएम पद पर गतिरोध को तोड़ने के लिए अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्षों के साथ चर्चा करेंगे।
गठबंधन में नाराजगी
इस बीच यूडीएफ के घटक दल आइयूएमएल ने सीएम चयन में देरी पर नाराजगी जताई है और कहा है कि इस अनिश्चितता के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। उधर, खरगे ने जिन नेताओं को दिल्ली बुलाया है उनमें एमएम हसन, वीएम सुदीरण, मुल्लापल्ली रामचंद्रन और के मुरलीधरन के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता और कन्नूर लोकसभा सीट से सांसद के सुधाकरण शामिल हैं।
इसके अलावा पूर्व रक्षा मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी से भी चर्चा की जाएगी, जिन्होंने 1996 से 2001 तक केपीसीसी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। इसके बाद खरगे और राहुल गांधी केरलम के नए सीएम पर अंतिम निर्णय लेंगे। सूत्रों के अनुसार अगले एक-दो दिन में यह तय हो जाएगा कि केरलम का सीएम कौन होगा।
कौन-कौन हैं रेस में?
हालांकि मुख्य रेस में वेणुगोपाल और सतीशन सबसे आगे हैं। कांग्रेस के 63 में से करीब तीन-चौथाई विधायकों की वेणुगोपाल के पक्ष में लामबंदी ने हाईकमान की चुनौती बढ़ा दी है। यहीं नहीं वेणुगोपाल को राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का भी समर्थन है मगर सतीशन केरल में कांग्रेस के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता है और आइयूएमएल समेत यूडीएफ में शामिल अधिकांश सहयोगी दल सतीशन को सीएम बनाने की पैरोकारी कर रहे हैं।
140 सदस्यीय केरलम विधानसभा में कांग्रेस के 63 विधायक विजयी हुए हैं। इसके अलावा उसकी सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयूएमएल) के पास 22, केरल कांग्रेस (केईसी) के पास आठ और आरएसपी के पास तीन विधायक हैं। यूडीएफ ने कुल 102 सीटें जीती हैं, जो दो-तिहाई बहुमत से अधिक हैं।
कांग्रेस में सीएम के लिए लंबी जंग पहली बार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के चयन पर निर्णय को लटकाया है। 2023 में कर्नाटक का चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में बड़ी लाबिंग देखी गई थी। दो प्रमुख दावेदार सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार शीर्ष पद यानी सीएम के लिए जोरदार ला¨बग कर रहे थे।
बाद में सिद्दरमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया जबकि शिवकुमार उनके डिप्टी बने। ऐसी लाबिंग और देरी 2018 में भी देखी गई थी, जब कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जीत हासिल की थी। मध्य प्रदेश में कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री के दावेदार थे तो राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट इस दौड़ में सबसे आगे थे।
अंतत: कई दिनों की अनिश्चितता के बाद कमल नाथ को मध्य प्रदेश में सीएम चुना गया जबकि राजस्थान में गहलोत को। पायलट राजस्थान के उपमुख्यमंत्री बने। छत्तीसगढ़ में भी सीएम के लिए काफी जंग देखने के बाद आखिरकार भूपेश बघेल को राज्य का नेतृत्व करने के लिए चुना गया।